


सम्मेलन में मुख्य वक्ता अनुज सह प्रांत ने अपने संबोधन में संघ की कार्य-शैली और उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्ट्र और समाज के लिए संघ क्यों आवश्यक है। इसके पश्चात डॉ. रुचि सेमवाल ने संगठन की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डालते हुए “पंच परिवर्तन” विषय पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने समाज में संस्कार, समरसता, राष्ट्रभाव, कर्तव्यबोध और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया इस अवसर पर

प्रसिद्ध कथावाचक सुभाष जोशी ने हिंदुत्व पर प्रभावी व्याख्यान दिया और सनातन संस्कृति, परंपराओं तथा मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया कार्यक्रम में सनातन समाज से जुड़े

गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं धर्मप्रेमी जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सम्मेलन के दौरान हिंदू समाज की एकता, संस्कृति, संस्कार और जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श

किया गया। वक्ताओं ने समाज को संगठित रहकर धर्म एवं राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया इसके पश्चात हिंदू समाज से जुड़े कामगार वर्ग के प्रतिनिधियों—जैसे बढ़ई, दर्जी, प्लंबर, वेल्डर आदि—को प्रांत प्रचारक द्वारा सम्मानित किया गया। समाज सेवा में सक्रिय रामानंद ठाकुर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत परशुराम चतुर्थवेद विद्यालय के बच्चों ने देशभक्ति गीत एवं मंत्रोच्चारण की प्रस्तुति दी। साथ ही जुनून अकादमी की संचालिका अर्चना सिंगल के विद्यार्थियों ने राम जन्म एवं शिव-लीला पर सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन निकुंज गुप्ता ने किया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे शैलेंद्र जी (प्रांत प्रमुख), राजकुमार तिवारी, पुनीत मित्तल, अनिल नंदा, डॉ. आदित्य कुमार, विश्वास डाबर, अर्चिता डाबर, राजकुमार शर्मा, संतोष जायसवाल, शुभ शुक्ला, आदेश चौहान, ऋषभ तिवारी, अनीता गर्ग, अनूप गोयल, नीतीश नंदा, गौरव बक्शी, पंकज मेसन, सत्येंद्र, राजकुमार शाह, राकेश सिंह, सुमित, मंजू कटारिया, डॉ. आनंद, अनिल डोरा, मनन, सिमरन सक्सेना अंशिता शर्मा आदि
सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी लोग मिलकर सनातन संस्कृति की रक्षा एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करेंगे


