Friday, March 13, 2026
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मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून ने एडवांस्ड रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी से 61 वर्षीय मरीज को फिर से चलने-फिरने में बनाया सक्षम

देहरादून: मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने घुटनों के गंभीर बाइलेटरल ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित 61 वर्षीय मरीज का सफल उपचार कर उन्हें दोबारा चलने-फिरने में सक्षम बनाया। एडवांस्ड रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और जॉइंट प्रिजर्वेशन सर्जरी के माध्यम से मरीज अब दर्द-मुक्त और अधिक सक्रिय जीवन जी पा रहे हैं।

मरीज श्री एस.सी. गर्ग पिछले कई महीनों से दोनों घुटनों में लगातार दर्द से परेशान थे। चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना और रोज़मर्रा के सामान्य कार्य भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गए थे। समय के साथ दर्द बढ़ने के साथ-साथ अकड़न और चलने-फिरने में गंभीर रुकावट आने लगी, जिससे उनकी स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव पड़ा।

मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून में की गई विस्तृत जांच में सामने आया कि बाएं घुटने के अगले हिस्से में आर्थराइटिस था, जबकि दाएं घुटने में गंभीर डीजेनेरेटिव आर्थराइटिस मौजूद था। मरीज की स्थिति का समग्र मूल्यांकन और उपचार विकल्पों पर विस्तृत चर्चा के बाद ऑर्थोपेडिक टीम ने मरीज के लिए एक विशेष सर्जिकल प्लान तैयार किया।

ऑर्थोपेडिक टीम का नेतृत्व डॉ. गौरव गुप्ता, डायरेक्टर – ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट, तथा डॉ. शुभम अग्रवाल, कंसल्टेंट – ऑर्थोपेडिक्स ने किया। टीम ने बाएं घुटने में रोबोटिक पेटेलोफेमोरल (पार्शियल नी) रिप्लेसमेंट और दाएं घुटने में रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की। यह प्रक्रिया नॉर्थ इंडिया की पहली और भारत की दूसरी रोबोटिक पेटेलोफेमोरल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी रही।

इस उन्नत तकनीक का उद्देश्य दर्द से राहत देना, जॉइंट की कार्यक्षमता बहाल करना और कम प्रभावित हिस्सों को सुरक्षित रखते हुए बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना था।

केस के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा,
“घुटनों का आर्थराइटिस व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। हमारा लक्ष्य केवल दर्द से राहत देना नहीं, बल्कि मरीज को आत्मविश्वास के साथ फिर से सक्रिय जीवन की ओर लौटाना है। पर्सनलाइज़्ड सर्जिकल प्लान और संरचित रिहैबिलिटेशन के ज़रिए अधिकांश मरीज दोबारा स्वतंत्र और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड में वर्षों से पार्शियल और टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की जा रही हैं। नई रोबोटिक तकनीक के आने से अब युवा और अधिक एक्टिव मरीजों के लिए जॉइंट प्रिजर्वेशन के बेहतर विकल्प उपलब्ध हो पाए हैं। यह तकनीक केवल प्रभावित हिस्से को अत्यंत सटीकता के साथ बदलने में मदद करती है, जिससे स्वस्थ जॉइंट संरक्षित रहता है और मरीज को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

डॉ. गुप्ता ने समय पर परामर्श के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा,
“अगर घुटनों का दर्द दवाइयों, फिजियोथेरेपी या जीवनशैली में बदलाव के बावजूद ठीक नहीं हो रहा है, तो उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर इलाज से जोड़ों को और नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर परिणाम संभव हैं।”

यह सर्जरी कंबाइंड स्पाइनल-एपिड्यूरल एनेस्थीसिया के तहत सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी के बाद मरीज को वॉकर सपोर्ट के साथ चलाया गया और एक संरचित फिजियोथेरेपी प्रोग्राम के तहत रिहैबिलिटेशन कराया गया। मरीज को स्थिर स्थिति में, नियमित फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून, उन्नत तकनीक, समय पर डायग्नोसिस, पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट और होलिस्टिक रिहैबिलिटेशन के माध्यम से मरीज-केंद्रित ऑर्थोपेडिक केयर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि लोगों की गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।

Ankur Singh
Ankur Singhhttps://hilllive.in
Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
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