Monday, June 15, 2026
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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के बे्रस्ट कैंसर सर्जन ने महिला को दिया नया जीवन

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ब्रेस्ट सर्जन की कड़ी मेहनत रंग लाई। स्तन में होने वाली छोटी सी गांठ को नजरअंदाज करना किस तरह गंभीर समस्या का रूप ले सकता है, इसका एक अनोखा उदाहरण श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में देखने को मिला। अस्पताल के ब्रेस्ट सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. नीलकमल कुमार और उनकी टीम ने 35 वर्षीय महिला के स्तन से 12.5 किलोग्राम वजन का फुटबॉल के आकार का विशाल फायलोड्स ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर मरीज़ को नया जीवन दिया है। विशेष बात यह रही कि करीब चार घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने स्तन के उभार को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। ऑपरेशन के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ है और उन्हें अस्पताल से 3 दिन बाद ही छुट्टी दे दी गई है।
वरिष्ठ ब्रेस्ट एवं एंडोक्राइन सर्जन डॉ. नीलकमल कुमार ने बताया कि मेडिकल साइंस में इस बीमारी को फायलोड्स ट्यूमर कहा जाता है।यह ट्यूमर दुर्लभ की श्रेणी में आता है लेकिन श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में ऐसे टय्मर का उपचार सफलतापूर्वक किया जा रहा है। श्री मंहत इन्दिरेश अस्पताल के सुपरस्पेशलिस्ट ब्रेस्ट विभाग में कुशल एवम् अनुभवी डाॅक्टरों की टीम उपलब्ध है। यही कारण है कि अस्पताल के ब्रेस्ट विभाग में ऐसे ट्यूमर सामान्य तौर पर उपचार के लिए आते हैं जो छोटे बड़े अस्पतालों में सर्जरी/सर्जरी न होने के बाद रैकरेंस/दोबारा ट्यूमर हो जाने के बाद मरीज़ को लेकर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ब्रेस्ट विभाग में पहुंचते हैं यह स्तन का एक अत्यंत दुर्लभ ट्यूमर होता है, जो सामान्य गांठ की तुलना में अत्यंत तेजी से बढ़ जाता है। केवल ट्यूमर के आकार या प्रारंभिक जांच के आधार पर यह तय करना संभव नहीं होता कि ट्यूमर कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट) है या नहीं। इसकी वास्तविक प्रकृति का पता बायोप्सी जांच के बाद ही चलता है।
उन्होंने बताया कि मरीज के स्तन में शुरुआत में एक छोटी गांठ थी, जिसके लिए वह स्थानीय स्तर पर उपचार ले रही थीं। भय, संकोच और जागरूकता की कमी के कारण उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने में काफी देरी कर दी। इस दौरान उन्होंने होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार भी लिया, लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं मिला। समय बीतने के साथ गांठ का आकार तेजी से बढ़ता गया और कुछ ही सप्ताहों में वह फुटबॉल के आकार के विशाल ट्यूमर में बदल गई।
ट्यूमर के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण मरीज को सांस लेने में कठिनाई, लगातार दर्द, सोने में परेशानी तथा दैनिक कार्यों को करने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से बचना और लोगों के बीच असहज महसूस करना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। ट्यूमर के लगातार बढ़ते आकार ने मरीज को मानसिक रूप से भी गहरे तनाव और भय की स्थिति में पहुंचा दिया था। उन्हें आशंका सताने लगी थी कि कहीं यह कैंसर तो नहीं है और उनका सामान्य जीवन प्रभावित न हो जाए
डॉ. नीलकमल कुमार ने बताया कि फायलोड्स ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती इसकी पुनरावृत्ति (लोकल रैकरेंस) की संभावना होती है। यही कारण है कि ऐसे जटिल मामलों का उपचार ब्रेस्ट विशेषज्ञों की देखरेख में किया जाना चाहिए। समय पर निदान, उचित शल्य चिकित्सा और नियमित फॉलो-अप के माध्यम से पुनरावृत्ति के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा मरीज को बेहतर दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त होते हैं

Ankur Singh
Ankur Singhhttps://hilllive.in
Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
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