Thursday, November 5, 2026
spot_img
spot_img
Homeउत्तराखंडउत्तराखंड के सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को भी मिल सकेगा तदर्थ बोनस,...

उत्तराखंड के सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को भी मिल सकेगा तदर्थ बोनस, सचिव विनय शंकर पांडेय ने जारी किए निर्देश

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत कर्मचारियों को भी वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस देने का रास्ता साफ कर दिया है। वित्त विभाग की ओर से दो नवंबर को जारी शासनादेश के क्रम में अब सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों के प्रशासनिक विभाग अपने अधीनस्थ संस्थानों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को बोनस देने के संबंध में स्वयं निर्णय ले सकेंगे। इसके लिए वित्त विभाग की अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। औद्योगिक विकास अनुभाग-2 के सचिव विनय शंकर पांडेय ने पांच नवंबर को इस संबंध में सभी सार्वजनिक उपक्रमों एवं निगमों के प्रशासनिक विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सार्वजनिक उपक्रमों को मिला निर्णय लेने का अधिकार

सचिव विनय शंकर पांडेय की ओर से जारी पत्र में वित्त विभाग के शासनादेश में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादकता असंबद्ध बोनस यानी तदर्थ बोनस देने की स्वीकृति प्रदान की गई है।इसी क्रम में सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को भी यह अधिकार दिया गया है कि जिन सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में बोनस की देयता बनती है और संबंधित संस्थान अपने संसाधनों से इसका वित्तीय भार उठाने में सक्षम हैं, वहां निर्धारित शर्तों के अधीन कर्मचारियों को तदर्थ बोनस देने का निर्णय स्वयं लिया जा सकता है। इस व्यवस्था से सार्वजनिक उपक्रमों को बोनस भुगतान के लिए वित्त विभाग की दोबारा सहमति लेने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

वित्तीय स्थिति का आकलन कर होगी कार्रवाई

सचिव विनय शंकर पांडेय ने सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ सार्वजनिक उपक्रमों और निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करें। यदि संबंधित संस्थान बोनस का भुगतान करने में सक्षम हैं तो शासनादेश में निर्धारित शर्तों और प्रतिबंधों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को तदर्थ बोनस अनुमन्य करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही इस संबंध में की गई कार्रवाई से सार्वजनिक उद्यम विभाग को अनिवार्य रूप से अवगत कराना सुनिश्चित किया जाए।

अधिकतम सात हजार रुपये की सीमा निर्धारित

वित्त विभाग के शासनादेश के अनुसार समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ के कर्मचारियों और समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारियों को तदर्थ बोनस का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए ग्रेड वेतन की अधिकतम सीमा 4800 रुपये यानी पुनरीक्षित वेतनमान में लेवल-8 तक निर्धारित की गई है। ऐसे कर्मचारी, जो किसी उत्पादकता आधारित बोनस योजना के अंतर्गत नहीं आते हैं, इस लाभ के पात्र होंगे। केंद्र सरकार के आदेश के अनुरूप अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों के आधार पर सात हजार रुपये की गणना सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि वास्तविक भुगतान पात्रता और निर्धारित गणना के आधार पर होगा।

छह माह की सेवा अनिवार्य, दैनिक वेतनभोगियों को भी लाभ

शासनादेश के अनुसार बोनस का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जो 31 मार्च 2026 को सेवा में कार्यरत थे और जिन्होंने इस तिथि तक न्यूनतम छह माह की निरंतर एवं संतोषजनक सेवा पूरी की हो। जिन कर्मचारियों ने पूरे एक वर्ष से कम लेकिन छह माह या उससे अधिक सेवा की है, उन्हें सेवा अवधि के अनुपात में बोनस दिया जाएगा।

वहीं कैजुअल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। ऐसे कर्मचारी जिन्होंने छह कार्यदिवस वाले कार्यालयों में पिछले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन अथवा पांच कार्यदिवस वाले कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन काम किया है, वे भी निर्धारित शर्तों के अधीन बोनस के पात्र होंगे। इनके लिए अधिकतम 1200 रुपये की मासिक परिलब्धि के आधार पर 30 दिनों का तदर्थ बोनस 1184 रुपये निर्धारित किया गया है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई और अन्य शर्तें भी लागू

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस भुगतान मामले के परिणाम आने तक स्थगित रहेगा। यदि कर्मचारी दोषमुक्त होता है तो नियमानुसार बोनस का लाभ मिल सकेगा। वहीं वर्ष 2025-26 में विभागीय कार्रवाई अथवा आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को तदर्थ बोनस देय नहीं होगा। इसके अतिरिक्त अवैतनिक अवकाश को छोड़कर अन्य प्रकार के अवकाश की अवधि को पात्रता की गणना में शामिल किया जाएगा। निलंबित कार्मिकों के लिए भी निर्धारित शर्तें लागू होंगी। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण यदि लाभ की स्थिति में हैं तो वे अपने कर्मचारियों को बोनस दे सकते हैं, लेकिन इसका पूरा वित्तीय भार संबंधित संस्थान को अपने संसाधनों से ही उठाना होगा। इसके लिए शासन की ओर से कोई अतिरिक्त अनुदान नहीं दिया जाएगा।

नकद भुगतान और वेतन मद में होगा लेखांकन

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुमन्य तदर्थ बोनस का भुगतान कर्मचारियों को नकद धनराशि के रूप में किया जाएगा। इसकी धनराशि संबंधित कर्मचारियों के वेतन व्यय वाले लेखाशीर्षक में दर्ज की जाएगी और मानक मद ‘वेतन’ के अंतर्गत लेखांकित होगी। सरकार के इस फैसले से सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को भी बोनस मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अब संबंधित संस्थानों की वित्तीय स्थिति और निर्धारित पात्रता के आधार पर बोनस भुगतान का निर्णय लिया जाएगा।

निगम कर्मचारियों को बोनस की राह खोलने पर मुख्यमंत्री धामी और सरकार का आभार : सूर्य प्रकाश रणाकोटी

राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने सार्वजनिक उपक्रमों एवं निगमों में कार्यरत कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस दिए जाने की दिशा में सरकार की ओर से की गई पहल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय निगम कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम है। लंबे समय से कर्मचारी बोनस की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब सरकार ने वित्तीय स्थिति के आधार पर निगमों को अपने स्तर पर बोनस देने का निर्णय लेने का अधिकार देकर कर्मचारियों के हित में सकारात्मक रास्ता खोला है। उन्होंने सचिव विनय शंकर पांडेय का भी आभार जताते हुए कहा कि महासंघ को उम्मीद है कि सभी निगम एवं सार्वजनिक उपक्रम अपने वित्तीय संसाधनों का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को जल्द बोनस का लाभ देंगे। यह निर्णय कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा

Ankur Singh
Ankur Singhhttps://hilllive.in
Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular