Saturday, December 3, 2022
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देहरादून: DAV, DBS, MKP, SGRR कॉलेजों में बदले नियम..अब एडमिशन के लिए देना होगा टेस्ट

देहरादून: अगर आपने भी इस वर्ष ग्रेजुएशन या फिर बारहवीं पूरी की है और आप भी देहरादून से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहते हैं तो इस खबर को अंत तक पढ़ें।

राजधानी देहरादून में अब स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देहरादून के इन चार बेहद महत्वपूर्ण कॉलेजों के अंदर अब मेरिट बेस पर नहीं बल्कि प्रवेश परीक्षा के बेस पर ही एडमिशन होगा। जी हां, डीएवी, डीबीएस समेत देहरादून के चार कॉलेजों में प्रवेश परीक्षा के जरिए प्रवेश लिया जाएगा। अब तक यहां पर मेरिट बेस के ऊपर ही प्रवेश लिया जा रहा था।

केंद्रीय विश्वविद्यालय से सम्बंधित दून के चार बेहद बड़े और नामी कॉलेज डीएवी डीबीएस, एमकेपी, श्री गुरु राम राय पीजी कॉलेज में स्नातक व स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में अब एंट्रेंस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश मिलेगा। छात्र एवं छात्राओं को केंद्रीय विश्वविद्यालय संयुक्त प्रवेश परीक्षा सीयूसीईटी करनी होगी।

जी हां, दून के 4 कॉलेजों में प्रतिवर्ष स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में करीबन 9000 छात्र एवं छात्राएं प्रवेश लेते हैं। यूजीसी ने देश के सभी 48 केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं उनसे संबंध कॉलेजों में केंद्रीय विश्वविद्यालय संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश का नियम लागू कर दिया है।

हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अजय खंडूरी ने देहरादून के इन 4 कॉलेज के प्राचार्यों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है। पत्र के अनुसार शैक्षिक सत्र 2022 से 23 में प्रवेश परीक्षा एनपीए यानी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने 22 मार्च को देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए यह आदेश जारी कर दिए हैं केंद्रीय विश्वविद्यालय संयुक्त परीक्षा पास करने के बाद ही देहरादून के कॉलेजों में प्रवेश मिलेगा।

श्री गुरु राम राय पीजी कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि परीक्षा का पैटर्न यूजीसी विस्तार से प्रकाशित करेगी।विश्वविद्यालय से संबंध कॉलेजों को हर वर्ष दाखिला की लंबी प्रक्रिया से निजात भी मिलेगा।

वहीं पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक का कहना है कि इस उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए यूजीसी ने यह बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अब स्नातक एवं स्नातकोत्तर की परीक्षा को पास करने के लिए 12 वीं एवं ग्रेजुएशन के प्राप्तांक मायने नहीं रखेंगे। इससे पारदर्शिता आएगी और सभी को समान रूप से मौका भी मिलेगा।

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