Tuesday, December 6, 2022
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चमोली : किसान का बेटा बना सेना में अफसर

उत्तराखंड के होनहार युवाओं के लिए भारतीय सेना सिर्फ करियर का विकल्प नहीं है, बल्कि कई युवाओं का वह सपना होता है जब बचपन से देखते आ रहे हैं और भारतीय सेना में शामिल होने के सपने को साकार करने के लिए कई युवा मेहनत करते हैं। देवभूमि और भारतीय सेना का यह बंधन अटूट है और वर्षों से चला आ रहा है। उत्तराखंड के कई युवा भारतीय सेना में शामिल होकर राज्य को गौरवान्वित कर रहे हैं।

चमोली जिले के एक ऐसे होनहार युवक से मिलवाने जा रहे हैं जिसने अपने घर की आर्थिक स्थिति को अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया और कड़ी मेहनत और प्रशिक्षण के बाद आखिरकार सेना में एक अधिकारी बन गया है। हम बात कर रहे हैं गैरसैंण के कृष्णा रावत की जिनके पिता किसान हैं और वे अपनी मेहनत से फौजी अफसर बने हैं, जिसके बाद से गैरसैंण ब्लॉक का पूरा इलाका गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

एमएलटीई मिलिट्री एकेडमी मऊ से पास आउट होने के बाद कृष्णा रावत भारतीय सेना का अभिन्न अंग बन गए हैं। भारतीय सेना में शामिल होने के बाद उनकी मां शांति देवी और उनके पिता सुरेंद्र सिंह रावत के चेहरों पर गर्व साफ नजर आ रहा है।

एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले कृष्णा रावत का जन्म 1999 में हुआ था और आठवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका परिवार गैरसैंण चला गया जहां उन्होंने सरकारी इंटर कॉलेज से 87 फीसदी अंकों के साथ इंटर की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद रुड़की आ गए।

रुड़की के कैंट क्षेत्र में सैनिकों की परेड देखकर कृष्णा का भारतीय सेना में शामिल होने का सपना भी बढ़ने लगा और इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने साल 2016 में एनडीए की परीक्षा दी लेकिन पहली बार में ही उन्हें निराशा हाथ लगी।

लेकिन  उसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और दोगुनी मेहनत कर दूसरे प्रयास में 2017 में एनडीए की परीक्षा क्लियर कर दिए और 17 जुलाई को और ओटीए में ज्वाइन किया जहां पर उन्होंने 1 वर्ष तक बेसिक सैनिक प्रशिक्षण लिया और उसके बाद टेक्निकल ट्रेनिंग के लिए वे एमएलटीई मऊ में गए जहां उन्होंने 3 वर्ष तक जमकर मेहनत की और कठिन परिश्रम किया।

इसके बाद कृष्णा रावत आखिरकार भारतीय सेना में अफसर बन गई हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और अपनी मां के साथ-साथ अपने शिक्षकों को भी दिया है। कृष्णा के पिता सुरेंद्र सिंह रावत किसान हैं और गांव में उनकी एक छोटी सी दुकान भी है। उनकी मां शांति देवी आंगनबाडी में सहायिका के रूप में कार्यरत हैं।

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