One nation, One election Bill : क्या सरकार ला सकती है एक देश एक चुनाव का बिल?

Ankur Singh

Opinion: ‘One Nation, One Election’ bill in Parliament: दिल्ली में जी20 समिट के आयोजन के एक हफ्ते बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि ये सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा। हालांकि, इसका क्या एजेंडा रहेगा इसकी कोई जानकारी उन्होंने नहीं दी। अचानक सत्र बुलाने की क्या वजह है? इसमें क्या एजेंडा रह सकता है, ये जानने के लिए बात करते हैं नवभारत टाइम्स के नैशनल ब्यूरो हेड नरेंद्र नाथ से।

आप जानते हैं, जिस तरह से कई मौकों पर हमलोगों ने देखा कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार चौंकाते रही हैं। आए दिन कोई न कोई फैसले लेती है जिसका पहले से कोई अनुमान नहीं होता है। इस तरह से जो विशेष संसद सत्र की घोषणा की गई वो भी कुछ ऐसा ही है। प्रह्लाद जोशी ने ट्वीट करके उसकी जानकारी दी और उसके बाद फिर तमाम तरह का विश्लेषण, अटकलें और एक-दूसरे को पूछने में लगे हैं कि उसका एजेंडा क्या है? सत्ता पक्ष, विपक्ष किसी को इस बारे में कोई आइडिया नहीं था। सभी अलग-अलग तरीके से अपने हिसाब से इस चीज को इंटरप्रिट कर रहे हैं। जैसे सरप्राइज आ गया कि क्या-क्या एलिमेंट होंगे? वो अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

ऐसी बात है कि 10 से ज्यादा विधेयक इस सत्र में पेश किए जा सकते हैं। तो ये कौन-कौन से बिल हो सकते हैं जिनकी चर्चा हो रही है।

देखिए, एक सामान्य बिल वाली बात तो बिलकुल नहीं है। आप जानते हैं कि उसके लिए संसद सत्र की जरूरत नहीं होती है। अगर सरकार को कोई बिल पास कराना होगा तो उसके लिए ऑर्डिनेंस एक रास्ता होगा। आपने देखा भी होगा कि संसद सत्र के बीच में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पक्ष में जब आदेश दे दिया था, तो उसको पलटने वाला ऑर्डिनेंस जारी कर दिया था या इससे पहले भी बड़े से बड़े हुए। इसीलिए ये किसी सामान्य या किसी खास बिल के लिए आएगा, ऐसी संभावना कम है। कहते हैं कुछ बिल ऐसे होते हैं, जिसका संकेतात्मक वैल्यू अधिक होता है, जिससे एक संदेश देने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे बिल जरूर हो सकते हैं, जैसे मैं चर्चाओं के आधार पर कह रहा हूं। पहली चर्चा ये हुई, क्या यह ‘ एक देश, एक चुनाव’ वाला बिल हो सकता है? उसके बैकड्रॉप में बहुत दिनों से चर्चा चल रही थी। साल के अंत में जो पांच राज्यों के चुनाव होंगे, उसके साथ लोकसभा का भी चुनाव हो सकता है। वो एक अलग बात है लेकिन कई बार बात उठी है। पहले आडवाणी ने बढ़ाया था और कई मौकों पर इलेक्शन रिफॉर्म्ड प्रोसेस में मोदी जी ने कहा कि एक देश में एक चुनाव होना चाहिए। पांच दिनों के सत्र में इसकी संभावनाओं पर बात हो सकती है क्या? उसमें चाहे तो प्रीपोल भी हो सकता है, या पांच राज्यों का इलेक्शन एक्सटेंड हो सकता है। या कई तरह की टेक्निकलटी होती है, उससे जुड़ा हुआ बिल आया तो। फिर कई राज्यों में विचार-विमर्श होगा। तो हो सकता है कि इस सत्र में किसी खास विषय पर चर्चा हो सकती है।

जी, आपने कहा कि समय से पूर्व चुनाव या फिर सभी चुनाव एक साथ कराने का कोई एक एजेंडा अचानक पेश करके चौंका सकती है सरकार। ये विपक्ष कई दिनों से अटकलें लगा भी रहे हैं। हम विपक्ष के और भी बयान सुन रहे थे। शिवसेना के उद्धव गुट के नेता अरविंद सावंत ने यहां तक कह दिया कि आज तक उत्सव के दौरान कभी भी संसद का सत्र नहीं बुलाया गया। तो एक तरह से विरोध के सुर उठने शुरू हो गए हैं इसके खिलाफ।

तमाम नेताओं ने जो कहा कि संसद का जब सामान्य सत्र होता है, तब तो वो मौजूद रहते नहीं हैं, सरकार बहस करती नहीं है। इससे संसद का विशेष सत्र बुलाकर क्या होगा। पक्ष-विपक्ष की टकराहट होती है तो वो स्वाभाविक है कि विपक्ष सरकार पर सवाल उठाएगी। इसके अलावा संभावनाओं की बात करें तो कुछ और भी चर्चा हो रही है। याद होगा, 28 जून को नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ था, उसके बाद संसद का मानसून सत्र हुआ। वो संसद की पुरानी बिल्डिंग में हुआ था। उसके बाद सवाल उठा कि संसद भवन का उद्घाटन हो गया तो फिर पुरानी बिल्डिंग में सत्र क्यों हो रहा है? तो ये भी हो सकता है कि संसद का नया भवन बना है, नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रॉजेक्ट था। इसकी शुरुआत एक स्पेशल सत्र के साथ हो। आज अगर प्रह्वाद जोशी का ट्वीट देखा होगा, तो उन्होंने अमृत काल से जोड़कर इसे व्यक्त किया है। तो ये भी माना जा रहा है कि भारत की आजादी के 75 साल को अमृत काल कह रहे थे, उसको नए पार्लियामेंट जोड़ते हुए और आगे ओवरऑल समग्र रूप से इस विजन को देखते हुए, जी20 समाप्त हुआ होगा। तो इससे भी जुड़ा सत्र हो सकता है। इसकी भी संभावना हो सकती है। अगर उस तरह का होगा तो शायद उसमें विवाद नहीं हो और विपक्ष की उसमें भागीदारी होगी।

यानी कि विशेष सत्र संसद के नए भवन में आयोजित किया जा सकता है। मानसून सत्र तो मणिपुर हिंसा पर पीएम मोदी के बयान की मांग पर हुए हंगामे की भेंट चढ़ गया। सिर्फ अंत में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान थोड़ी चर्चा देखने को मिली थी। विशेष सत्र में भी हंगामे के आसार हैं? या जिस सार्थक बहस की बात संसदीय कार्यमंत्री ने अपने ट्वीट में कही, वो देखने को मिल सकती है?

वही, मैंने कहा कि सरकार एजेंडा किस तरह का तय करती है। अगर एक देश, एक चुनाव या कहीं न कहीं पॉलिटिकल एजेंडा के रूप में विपक्ष लेगी तो संसद में हंगामा होगा। लेकिन अगर सिर्फ नया पार्लियामेंट हुआ, एक जनरल सत्र जैसे जी20 के बाद नैशनलिज्म और 2047 में हमारा अगला गोल क्या होना चाहिए अगर कुछ ऐसा थीम बनाकर सरकार पेश करती है तो शायद विपक्ष के लिए इसे अधिसूचित करना इतना आसान नहीं होगा। आपने देखा होगा कि संसद में हंगामे के बावजूद कुछ मौकों पर, अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई। और सरकार ने भी जरूरी बिल पास भी कराए। तो ये बड़ा ट्रिकी होगा, क्लियरिटी तब आएगी जब सरकार की ओर से पांच दिन के सत्र के एजेंडे को साफ किया जाएगा। और विपक्ष के साथ संवाद स्थापित होगा, तभी इसमें आइडिया लग पाएगा कि क्या होगा। अन्यथा चुनाव से ठीक पहले जब भी कुछ होता है तो सियासी कड़वाहट दिखती है।

जी, तो फिलहाल इस विशेष सत्र को लेकर सवाल तो कई हैं। कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन शायद धीरे-धीरे इसकी परतें खुलें और तब समझ में आए कि क्या वजह हो सकती है। नरेंद्र नाथ जी, शुक्रिया आपका।

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Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
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