उत्तराखंड: तीसरी लहर आई तो फिर झेलनी पड़ सकती है मुश्किल, दुर्गम क्षेत्रों में इलाज से लेकर संसाधन का अभाव

Ankur Singh

देश के साथ ही राज्य में भी कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य कितना तैयार है। राज्य सरकार दूसरी लहर के समय से ही अस्पतालों में संसाधन बढ़ाने के प्रयास कर रही है। हजारों की संख्या में बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य उपकरण जुटाए जा रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि राज्य के पर्वतीय जिलों के अस्पतालों में इन संसाधनों का उपयोग करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। ऐसे में यदि तीसरी लहर आई तो राज्य में लोगों के सामने फिर समस्या खड़ी हो सकती है।

वेंटीलेटर हैं लेकिन पर्याप्त डॉक्टर नहीं
राज्य में कोरोना से निपटने के लिए सरकार 1451 से अधिक वेंटीलेटर खरीदे हैं। लेकिन यदि इसकी तुलना में फिजीशियन की संख्या देखी जाए तो वह बेहद कम है। स्वास्थ्य विभाग के राज्य में सिर्फ 32 फिजीशियन हैं। जबकि एनेस्थीसिया के डॉक्टरों की संख्या 62 है। फिजीशियन और एनेस्थीसिया के डॉक्टरों की कोविड मरीजों के इलाज व आईसीयू, वेंटीलेटर संचालन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन इन डॉक्टरों के अभाव में या तो अधिकांश अस्पतालों में वेंटीलेटर का उपयोग नहीं हो पाएगा या फिर अप्रशिक्षित स्टाफ की वजह से मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाएगी। हाल में संपन्न हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कई विधायक इस समस्या की ओर सरकार का ध्यान भी आकृष्ट करा चुके हैं।

पर्वतीय जिलों का सबसे बुरा हाल
एसडीसी फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के चमोली जिले में सिर्फ एक फिजीशियन तैनात है। इसी तरह रुद्रप्रयाग में तीन, टिहरी में एक, उत्तरकाशी मे दो, पिथौरागढ़ में दो, बागेश्वर में दो, चंपावत में दो और पौड़ी में सिर्फ तीन फिजीशियन तैनात हैं। ऐसे में यदि तीसरी लहर आती है तो मरीजों की स्थिति क्या होगी और अस्पतालों में उन्हें कैसा इलाज मिलेगा यह आसानी से समझा जा सकता है। एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का मानना है कि राज्य में कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए इंतजाम बढ़ाने की जरूरत है। खासकर अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जाना चाहिए।

ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता बढ़ी लेकिन
कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक परेशानी ऑक्सीजन को लेकर सामने आई थी। इसे देखते हुए ऑक्सीजन उत्पादन और स्टोरेज क्षमता बढ़ाई जा रही है। सभी जिलों में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। राज्य में कुल 88 ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की जा रही है जिसमें 71 ने काम करना भी शुरू कर दिया है। लेकिन ऐन वक्त पर यह सिस्टम काम कर पाएगा कि नहीं यह देखना अभी बाकी है।

सरकार का दावा- तीसरी लहर के लिए विभाग पूरी तरह तैयार
इधर स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत का कहना है कि तीसरी लहर के लिए सरकार ने तैयारी पूरी कर ली है। राज्य में कुल 13 हजार से अधिक ऑक्सीजन बेड में से 6572 बेड कोरोना संक्रमितों के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके साथ ही 1451 वेंटिलेटर्स में से 1016 वेंटीलेटर्स कोविड मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं।

डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग व मेडिकल कॉलेजों के पास 8179 ऑक्सीजन बेड एवं निजी अस्पतालों के पास 5495 ऑक्सीजन बेड उपलब्ध है। बच्चों के लिए 2243 ऑक्सीजन बेड उपलब्ध हैं। इसी तरह 2113 आईसीयू बेड, 503 आईसीयू बेड, 494 निक्कू बेड कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए आरक्षित किए गए हैं। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की सूरत में 69 बाल रोग विशेषज्ञ, 32 स्टाफ नर्स, 31 फिजीशियन, 60 मेडिकल ऑफिसर्स, 35 एनेस्थेटिस्ट तथा 537 ईएमटी कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया गया है।

 

Share This Article
Follow:
Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
Leave a comment