Tuesday, December 6, 2022
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उत्तराखंड: पिथौरागढ़ के मनीष ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

युवा पर्वतारोही 26 वर्षीय मनीष कसनियाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया है. उन्होंने सिक्किम की अपनी महिला साथी मनिता प्रधान के साथ मुश्किल हालात में यह उपलब्धि हासिल की। उनके एवरेस्ट फतह करने की सूचना के बाद उनके गृह क्षेत्र में खुशी की लहर है। कासनी निवासी मनीष ने मंगलवार सुबह 5 बजे समुद्र तल से 8848 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह कर लिया है. मनीष सोमवार रात दस बजे बेस कैंप चार से एवरेस्ट फतह के लिए साथी पर्वतारोही मनीता, टुक्टे और कमी शेरपाओं के साथ निकले।

उन्होंने मंगलवार सुबह पांच बजे एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और इतिहास के सुनहरे अक्षरों में अपना नाम लिख दिया. वह मंगलवार देर रात बेस कैंप टू और बुधवार को बेस कैंप पहुंचे। मनीष इसी अभियान के लिए 28 मार्च को दिल्ली से नेपाल के लिए रवाना हुए थे। 6 अप्रैल से, उन्होंने अभियान के लिए कठोर प्रशिक्षण लिया। केंद्रीय युवा कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने अभियान दल को झंडी दिखाकर रवाना किया। एवरेस्ट विजेता मनीष कसनियाल सोशल मीडिया पर भी अपने अभियान की जानकारी देते रहते हैं।

माउंट एवरेस्ट

14 अप्रैल से 8 मई तक वह अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट करते रहे। 8 मई की पोस्ट में, वह आधे रास्ते में एवरेस्ट पर थे। उन्होंने विधायक चंद्र पंत, हंस फाउंडेशन और साथी बसु पांडे, जया, पूनम खत्री, राकेश देवलाल, मनीष डिमरी आदि सहित परिवार के सदस्यों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें इस अभियान के लिए प्रेरित करके मदद की।

साल 2019 में देश भर से 110 युवा पर्वतारोहियों को एवरेस्ट मैसिफ अभियान के लिए चुना गया था। मनीष ने काफी मेहनत के बाद एवरेस्ट फतह करने वाली अंतिम 12 की टीम में एवरेस्ट फतह करने के लिए जगह बनाई। इस अभियान के तहत 8848 मीटर ऊँचे एवरेस्ट, 8516  मीटर ऊँचे ल्होत्से, 7864 मीटर ऊँचे पुमौरी, 7161 मीटर ऊंचे नुपसे पर्वत  को फतह करने के लिए 12 सदस्य चार समूहों में निकले।

त्रिशूल, गंगोत्री तृतीय, बलजोरी, लामचीर, बीसी रॉय आदि। वर्ष 2017, 18, 19 में एक दर्जन से अधिक पर्वत श्रृंखलाओं पर विजय प्राप्त की गई है। वर्ष 2018 में मनीष और ब्रिटिश पर्वतारोही जॉन जेम्स कुक ने 5782 मीटर ऊंची मुनस्यारी को फतह किया था। पश्चिमी छोर से चोटी नंदा लापक। इस अभियान में उन्हें एक सप्ताह का समय लगा। वे गढ़वाल के त्रिशूल और लद्दाख के स्टोक कांगड़ी गए। इसके लिए मनीष को दो बार राज्यपाल पुरस्कार और राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान भी मिल चुका है। मनीष की पहल पर ही आइस संस्था ने भुरमुनी में वॉटर फॉल रैपलिंग की शुरुआत की थी। मनीष बिर्थी में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए हुई आइस संस्था की वॉटरफॉल रैपलिंग में भी शामिल रहे हैं।

मनीष के एवरेस्ट फतह करने की सूचना मिलते ही परिवार के लोगों में खुशी का माहौल है। पिता पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र कसनियाल, मां ममता, दादा ईश्वरी दत्त कसनियाल, दादी बसंती देवी, बहन हिना, चाचा विद्या सागर, चाची हंसा देवी, भाई राहुल में खुशी की लहर है।  पिता ने बताया कि उन्हें नेपाल से अपने बेटे के एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई की जानकारी मिली थी। मनीष बचपन से ही एडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़े रहे हैं। एवरेस्ट फतह करने पर गर्व महसूस हो रहा है।

मनीष ने पर्वतारोही आइस संस्था के बासू पांडेय और जया पांडेय से पर्वतारोहण की बारीकियां सीखीं हैं। बचपन से ही मनीष को साहसिक खेलों में रुचि थी। मनीष को साहसिक खेलों में लाने वाले उनके पर्वतारोही गुरु बासू देव पांडेय और जया पांडेय हैं। वर्ष 2008 में आइस संस्था से जुड़े। इसके बाद उन्होंने साहसिक खेलों में अपना हुनर निखारा। प्रशिक्षक बासू देव ने बताया कि इस बार एवरेस्ट फतह करना चुनौतीपूर्ण रहा।

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