Friday, March 13, 2026
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नमामि गंगे पर कैग की कड़ी टिप्पणी, उत्तराखंड में 21 STP बिना घर कनेक्शन, घाट-श्मशान सूने, कचरा अब भी गंगा में

गंगा सफाई के लिए शुरू किए गए केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी नमामि गंगे मिशन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने उत्तराखंड में इसकी जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद राज्य में कई योजनाएँ अधूरी, अप्रभावी या प्रतीकात्मक बनकर रह गई हैं। कई स्थानों पर सीवेज शोधन संयंत्र (STP) तो बनाए गए, लेकिन उन्हें घरों से जोड़ा ही नहीं गया, जिससे गंदा पानी अब भी सीधे गंगा में जा रहा है।

कैग के अनुसार 2014 से 2023 के बीच गंगा पुनर्जीवन परियोजनाओं के लिए कुल 14,260 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिनमें से 1,149 करोड़ रुपये उत्तराखंड को मिले। इसके बावजूद राज्य में न तो व्यापक रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्लान बन सका और न ही घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने का काम प्रभावी ढंग से हो पाया।

सात स्तर की व्यवस्था, लेकिन योजना का अभाव

गंगा सफाई के लिए राज्य गंगा समिति, स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा (SMCG), जिला गंगा समितियाँ, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी निकाय और अन्य एजेंसियों की बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई गई थी। लेकिन कैग ऑडिट में सामने आया कि SMCG अपनी स्थापना के 13 साल बाद भी राज्य स्तर की नदी बेसिन योजना तैयार नहीं कर सकी। गंगा और उसकी सहायक नदियों से जुड़े जिलों में भी किसी जिला गंगा समिति ने जिला स्तर की योजना नहीं बनाई।

21 STP बने, लेकिन घरों से कनेक्शन नहीं

रिपोर्ट में सामने आया कि गंगा तटीय सात कस्बों में बने 21 STP किसी भी घर से जुड़े ही नहीं हैं। ये संयंत्र केवल नालों से आने वाला ग्रे वॉटर ट्रीट कर रहे हैं, जबकि वास्तविक सीवेज अब भी नदी में जा रहा है। जोशीमठ, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कीर्तिनगर और श्रीनगर जैसे कस्बों में करोड़ों रुपये खर्च कर सीवर लाइन और STP बनाए गए, लेकिन घरों को इनसे जोड़ने की योजना ही नहीं बनी।

जोशीमठ केस स्टडी, करोड़ों खर्च, फिर भी समस्या जस की तस

जोशीमठ में 2010 और 2017 की योजनाओं पर 42.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें सीवर लाइन और दो STP बनाए गए। लेकिन कैग के अनुसार एक भी घर इनसे नहीं जोड़ा गया। बाद में भू धंसाव की घटनाओं के बाद 2023 में नई 202 करोड़ की योजना बनाने की बात सामने आई।

STP शुरू होते ही ओवरलोड

रिपोर्ट में कई STP की क्षमता कम आंके जाने के उदाहरण भी सामने आए।

जगजीतपुर, हरिद्वार (68 MLD STP)

मार्च 2023 में संयंत्र औसतन 71 MLD और अधिकतम 84 MLD सीवेज प्राप्त कर रहा था।

ढालवाला, ऋषिकेश (7.5 MLD STP)

शुरू से ही क्षमता कम पड़ने लगी और अतिरिक्त सीवेज सीधे गंगा में छोड़ा गया।
चोरपानी, ऋषिकेश (5 MLD STP)

संयंत्र शुरू होते ही क्षमता से अधिक सीवेज आने लगा।
कैग ने कहा कि DPR बनाते समय जनसंख्या, सीवर नेटवर्क और भविष्य की जरूरतों का सही आकलन नहीं किया गया।

कई कस्बों में STP ही नहीं
गौचर जैसे गंगा तटीय कस्बे में करीब 3,930 घर हैं लेकिन कोई STP नहीं है। यहाँ लोग अब भी पुराने सोख पिट सिस्टम पर निर्भर हैं।

स्लज किसानों के खेतों में, भारी धातुओं का खतरा

हरिद्वार के STP से निकले 51,071 घन मीटर स्लज किसानों को खाद के रूप में बाँट दिया गया, जबकि लैब रिपोर्ट में इसमें भारी धातुओं की मात्रा अधिक पाई गई।

घाट और श्मशान घाट भी बेकार

ऑडिट में बने 11 नए शवदाह गृहों का निरीक्षण किया गया तो पाया गया कि अधिकांश स्थानों पर लोग आज भी नदी किनारे ही अंतिम संस्कार कर रहे हैं। कई श्मशान या तो बंद हैं या जर्जर हालत में पड़े हैं।

कचरा अब भी गंगा की ढलानों पर

गंगा तटीय शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन भी गंभीर समस्या बना हुआ है।
कैग के अनुसार कई जगहों पर कचरा सीधे नदी की ढलानों पर फेंका या जलाया जाता है, जिससे प्लास्टिक और राख बारिश में बहकर गंगा में चली जाती है।

देवप्रयाग से हरिद्वार तक 32 गुना बढ़ा कोलीफॉर्म

जल गुणवत्ता के आंकड़ों में भी चिंता सामने आई। देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच टोटल कोलीफॉर्म स्तर 32 गुना तक बढ़ा पाया गया।

सुरक्षा ऑडिट तक नहीं हुआ

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उत्तराखंड में नमामि गंगे की परिसंपत्तियों का सुरक्षा ऑडिट कभी नहीं कराया गया, जबकि इसके निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे।
CAG की सिफारिशें
कैग ने राज्य सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं—
सभी STP का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए
राज्य और जिला स्तर पर नदी बेसिन प्रबंधन योजना बनाई जाए
STP, ड्रेन इंटरसेप्शन और घर कनेक्शन को एक साथ योजना का हिस्सा बनाया जाए
बड़ी योजना, लेकिन जमीन पर सवाल
कैग की रिपोर्ट संकेत देती है कि भारी बजट और बड़ी घोषणाओं के बावजूद उत्तराखंड में नमामि गंगे मिशन अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया है।
गंगा की वास्तविक सफाई के लिए अब योजनाओं से अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी दक्षता और स्थानीय भागीदारी की जरूरत बताई गई है।

Ankur Singh
Ankur Singhhttps://hilllive.in
Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
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