Wednesday, March 4, 2026
spot_img
spot_img
Homeउत्तराखंडबटोली गांव बना ग्रामीणों के लिए मुसीबत, घरों में कैद होने को...

बटोली गांव बना ग्रामीणों के लिए मुसीबत, घरों में कैद होने को मजबूर है ग्रामीण, वोट मांगने तक सिमित रहें जनप्रतिनिधि

राजधानी से महज कुछ दुरी पर बसा प्राकृतिक सौंदर्य को संजोऐ बटोली गाँव आखिर क्यों आज कल बना है संकट का गांव, किसकी सजा भुगत रहें है गांव वाले, क्यों कर रहें है पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने की बात, क्यों स्थानीय विधायक, ग्राम प्रधान पर लगा रहें है उत्पीड़न का आरोप, क्या सर्फ वोट मांगने तक ही सिमित रहें गए जनप्रतिनिधि इस प्रदेश में हादसा होने के बाद जागता है शासन प्रशासन

सहसपुर विधानसभा में इस गांव के लोग झेल रहे कालापानी जैसी सजा, आवाजाही के लिए कर रहे मौत की गहरी खाई को पार, सिस्टम ने इस गाँव को खुद के हाल पर छोड़ा यह दुर्भाग्य ही है कि राजधानी से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित सहसपुर विधानसभा का दूरस्थ गांव बटोली अपना अस्तित्व बचाने के लिये जूझ रहा है। बटोली गाँव के ग्रामीण इन दिनों बड़ी परेशानी से घिरे हुए हैं और ये परेशानी इन ग्रामीणों के लिये सजा ऐ काला पानी जैसी साबित हो रही है। देर रात बलवीर की माताजी की तबियत ख़राब हो गई, जैसे कैसे रात बताई गई सुबह का इंतजार किया गया ताकि रास्ते बनाया जा सकें, फिर सुबह ग्रामीणों ने श्रमदान किया रास्ता चलने लायक बनाया गया, बड़ी मुसीबत को पार कर रास्ते तक बीमार महिला को पहुंचाया गया। वहीं दूसरी और पंत जी की पत्नी गर्भवती है जिसको आज डाक्टर को चेकअप के जाना था, परन्तु ग्रामीणों द्वारा बनाऐ गए रास्ते से उतर नहीं पाई, रास्ता बहुत ज्यादा ख़राब होने के कारण उनको घर पर कैद होने को मजबूर हो गई ग्रामीण पंत जी ने बताया की अब उनको यंहा से करीब चार से पांच किलोमीटर पैदल जंगल के रास्ते जाना होगा जिससे की वह दूसरे नजदीकी गांव डूंगा पंहुचा जा सकें इस गाँव में बरसात के चार माह ग्रामीण घरों में कैद रहने को मजबूर हैं, पूर्व में ये मुद्दा गरमाने के बाद जब समस्या का कोई स्थाई हल नहीं निकला तो पर ग्रामीणों को अस्थाई रूप से विस्थापित करने की बातें हुई, लेकिन शासन प्रशासन और स्थानीय विधायक इसे हकीकत का रूप देने में अब तक विफल साबित हुए हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर मौन है। विपक्ष का कोई नेता आज तक ग्रामीणों के हालात जानने नहीं पहुंचा कोई इन मुट्ठी भर ग्रामीणों का दर्द नहीं बांट रहा है। दरअसल बटोली गांव और कोटी गांव के बीच पिछले 35 सालों से एक लैंड स्लाइड जोन बना हुआ है, जहां पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से हर साल पहाड़ी से टूटकर मलबा आता रहता है और लगभग चार माह के लिये ये यहां बनाया गया अस्थाई मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाता है, लेकिन इस बार जो हालात हैं, वो रूह कंपा देने वाले हैं, दरअसल यहां जमे हुए पुराने मलबे का पूरा पहाड़ रातों रात खिसक गया, जिसके चलते अब एक भयावह विशाल खाई यहां बन गई है। बटोली गांव से मुख्यालय का संपर्क पूरी तरह से कट चुका है, बावजूद इसके‌ ग्रामीण मजबूरी में जान को जोखिम में डालकर इस मौत की खाई से आना जाना कर रहे हैं। ग्रामीण चार माह का राशन लेकर गांव में कैद हो जाने को मजबूर हो जाते हैं। दुर्गम क्षेत्र में स्थित यह सुंदर गांव इस विकट समस्या के कारण वर्तमान में नरक का द्वार साबित हो रहा है। किसी भी आपातकाल की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा ये बड़ा सवाल भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भाऊवाला में सरकार द्वारा आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में स्थानीय विधायक सहदेव पुंडिर की मौजूदगी में ग्रामीणों को अस्थाई रूप से विस्थापन करने की बात की गई थी। जिस पर सहमति भी बन गई थी, लेकिन आज तक इस दिशा में ना तो स्थानीय विधायक और ना शासन प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाए। करीब 35 साल से ग्रामीण इस समस्या का सामना कर रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि कोई हादसा होने पर ही क्या स्थानीय विधायक और शासन प्रशासन चेतेगा

Ankur Singh
Ankur Singhhttps://hilllive.in
Ankur Singh is an Indian Journalist, known as the Senior journalist of Hill Live
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular